एक छोटासा बच्चा

June 2nd, 2020 by Jashodhara Purkayastha

रोज की तरह ,मैं मेरी छोटीसी एक बंगलो में बैठी थी। मैं और मेरे पति अविनाश हाथ में समाचारपत्र लेकर बैठे थे।
हम सुबह के चाह नीचे ही पीते हैं । क्योंकि हमारे ड्रॉइंग रूम नीचे ही हैं।
मेरा बंगलो दो मंजिल वाली हैं। नीचे एक तरह रोसईघर ,एक तरह छोटीसी ड्रॉइंग रूम।
रूम में एक छोटीसी TV भी हैं। एक बुकशेल्फ हैं। जँहा पर थोड़ीसी किताबें रक्खी हुई है क्योंकि मुझे किताब पड़ना पसंद हैं।
रोसोईघर में एक फ्रीज़ और सैमसंग माइक्रो ऑवन हैं। शुद्ध पानी के लिए एक वाटर फ़िल्टर हैं। वर्तन और गॅस स्टोव के बारे में बताना ज़रूरी नहीं हैं। काँच के वर्तन के लिए एक छोटीसी अलमिरः हैं। यह मेरी पसंदीदा वस्तु हैं।
मेरा छोटासा बंगलो के प्रवेशद्वार के एक कोने में एक गन्देफुल के गुच्छे हैं। ज्यादा फूल तो नहीं है लेकिन सदाफूली हैं क्योंकि वे शिवजी को बहुत पसदं हैं। भीतर आतेही ऊपर जानेवाले बड़ा और चौड़ा सीड़ी दिखाई देता।
शायद जो लोग मुम्बई के हैपेरसिटी मॉल में गए हैं, उन्होंने देखा हैं वे सीढ़िया ऐसेही सीढ़िया मेरी दूसरी मंजिल तक जाते हैं।
उसदिन चाह शेष करने के बाद ,मैन सोचा क्यों न मैं अब अख़बार पढ़ लूँ। जैसे ही मैं ,समाचारपत्र के लिए हात बड़ाई, देखती हूँ, एक पाँच / छः साल का एक लड़का सीढ़ी से ऊपर जा रहा हैं। उसके शरीर पर न शार्ट न बनियन हैं। नीचे एक नीली सी हाफ पेन्ट।
उसे देखतेही मैंने आवाज दी ।उठकर सामने देखने लगी। दरवाजा तो बंद हैं ! तो वह आया कैसे ? मनमें सोची शायद सिटकनी बंद नही किया था।

मैंने पति से पूछा ,”आपने दरवाजे की कुंडी लगाए थे?”
उनका उत्तर सुननेके पहले ही मैं ऊपर जाने लगी। दो सीढ़ी बाकी थी, मैं देखती हूं, वह लड़का हमारे रूम में एक लंबीसी टेबल हैं। उसमे काफ़ी सारे ड्रावर हैं। उसके ऊपर एक सूटकेस रखा था।।

सीढ़ी से सूटकेस दिखाई देता हैं। देखती हूं, लड़का सूटकेस के पीछे छुपे हुए हैं। टेबल और सूटकेस के बीच से उसकी आँखे चमक रही हैं।
मैंने उसको जोर जोर से बुलाने लगी। वह नहीं आया। दो बार बुलाने के बाद ,वह तरतर कर सीढ़ीसे निकल गया। मैं चिल्लाकर पति को बुलाया। देखते ही देखते लड़का निकल गया। उन्होंने पूछा,”कौन सा लड़का ?”
उनको तो पताभी नहीं था कि लड़का ऊपर था। लड़का नीचे जाकर मुख्य दरवाजा से निकल गया।
निमिष में देखती हु वह खेत के भीतर से भाग रहा हैं।
मैं चिल्लाते हुए उसके पीछे भाग रही हु। मेरी बाल बहुत लंबी हैं। मैं एक फुलवारी कमीज पहन रक्खी थी। उसके पीछे भागना क्या मेरे बस में हैं!!
खेत के किनारे एक ताड़ के पेड़ हैं। भागते भागते मैं थक गयी और रुक गयी। पीछे मोडक़र देखती हु काफ़ी दूर आ गयी।
दूर एक पीली और सफेद चार माले की इमारत दिखाई दिया।
हैरान हो गयी देखकर !
वही छोटासा बालक ;छत से मुझे हाथ हिलाकर फिर मिलेंगे बोल रहा हैं।
मन में सोची, इतने समय में वह कैसे छत पर चला गया ! बार बार हाथ हिला रहा हैं। मैं खुश हो गयी कि वह उस बिल्डिंग में रहता हैं।
मैं खुश होकर घूम गयी और सोचने लगी, अगर ज़रा रुकता था,तो मैंने एक फल भी दे देती थी। छोटा सा बच्चा ही तो हैं। मेरे फ्रीज़ में एक मिल्क चॉकलेट भी हैं। यह सोचते निकल जा रही थी; देखती हु, हर बिल्डिंग से मुझे हाथ हिलाकर स्वागत कर रहा हैं।
मैं भी हँसकर उसे हाथ दिखाया।
मैं जोर से चिल्लाई “बेटे चॉकलेट ! चॉकलेट! मेरे पति ने मुझे एक धक्का देकर बोले,” चॉकलेट खाने की उतनीही शॉक हैं तो सुबह उठकर खा लेना।
मैं मुस्कराकर पास लेकर फिर से नींद में चली गयी।

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