भारतमाता

May 29th, 2020 by Jashodhara Purkayastha

भारत मेरा देश है,
प्यारा हिन्दुस्थान हैं।
हम उसके संतान है,
अलग अलग प्रदेश होकर भी एक है |

मिटटी इसका सोना है,
नदी का जल तो रूपा है
दोनों के ही मिलने से,
अमृत और मधुरता का फल मिलता है |

मेरा देश वैचित्रतासे भरे हैं,
विभिन्नोतासे संमृद्ध हैं।
हराभरा हैं चारो तरफ़,
रानी जैसी घूँघट ओढ़कर।

भिन्न भिन्न जाती है,
रहन – सहन अलग है
अलग अलग भाषा है,
फिर भी हम सब एक है |

कोई बंगाली, कोई मद्रासी,
कोई मराठी, कोई गुजरती
कोई कश्मीरी, कोई पंजाबी,
बोलते छब्बीस सुन्दर बोली |

भाषा अलग, अलग परिधान,
विविधता से उत्सव मनाते
लेकिन सबके स्वर में एकही भाषा,
हम बोलते हैं प्यार की भाषा |

हम हो गए कितने उन्नतशीर,
लेकिन कहाँ गए वे सुपूत वीर
जिसने लाए हैं,तिरंगा ऊँचेपर,
सतंत्रता के सत्तर साल पर।

हर साल में कुछ पाया हैं तो,
कई साल में कुछ खोया |
भारत भूमि श्रेष्ठ बनेगा,
जब हर किसीको मान मिलेगा।

हर दिन क्यों सुपुत संतान,
देश की रक्षा में हो रहे बलिदान?
समाधि पर फूल बरसाकर,
क्यों कर देते हैं उनके बिदाय?

भारतवर्ष हैं सबसे शानदार,
प्रगती के पथपर हैं सबसे दीप्तिमान,
जिनके लिए भारत ने पाया खुब सम्मान,
देश के हितमें प्रतिज्ञा लेंगे, न हो इसकी अपमान|

आओ सब से कहे,भारत प्रधान,
बनाये इसको ,छुए आसमान,
अगर प्यार हैं भारतमाता पर,
तो जरूर कामियाब होंगे उसपर।

यशोधरा पुरकायस्थ

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