Pratiyogita
May 17th, 2008 by jashodhara
प्रतियोगिता
कर्म करो आगे बढो
यह जीवन का लक्ष
कभी ना करो फल की आशा
वें लेते है सदा सही का पक्ष |
प्रतियोगिता तो एक साधन है
जो देते है एक दिशा
प्रतिद्वंदिता करना हो तो
स्वयं के साथ करना |
स्वयं को बनाओ इतने उंचे
स्तर स्तर से आगे
देखोगे यह आकांक्षा तुम्हे
कहाँ से कहाँ पहुंचतें |
(Pratiyogita) Competition is only with oneself…
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